BSEB मैट्रिक-इंटर की कॉपियां कैसे जांची जाती हैं? (Bihar Board Copy Checking Process): नमस्कार दोस्तों अगर आप बिहार बोर्ड मैट्रिक या इंटर की परीक्षा में शामिल होने वाले हैं तो आपको यह सवाल है जरूर सत्ता होगा कि आखिर बिहार बोर्ड के मैट्रिक इंटर परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की कॉपियां कैसे कैसे जांची जाती हैं? इसका एक कारण यह भी है कि अधिकतर ऐसे छात्र जो मैट्रिक या इंटर की परीक्षा दे चुके होते हैं उनके मुंह से यह सुनने को मिलता है कि वह मुझसे पढ़ने में कमजोर था लेकिन फिर भी उसके मार्क्स मुझसे ज्यादा आए हैं। और दूसरा सवाल यह भी होता है कि इतने लाखों छात्रों की कॉपियां के बीच टॉपर के कॉपियां का चयन कैसे होता है।
आज के इस आर्टिकल में हम आपके सवालों के जवाब तो देंगे ही इसके साथ ही बिहार बोर्ड मैट्रिक इंटर की एक सीक्रेट स्टेप-मार्किंग के बारे में भी बताएंगे, जिससे फेल होने वाले छात्र भी पास हो जाते हैं। अगली बार से अगर कोई छात्र आपको कहता है कि वह लड़का मुझे कमजोर था पढ़ने में फिर भी उसके मार्क्स मुझसे ज्यादा कैसे आ गए तो उसे यह आर्टिकल (Bihar Board Copy Checking Process) शेयर जरूर कर दीजिएगा।
डिजिटल इवैल्यूएशन: अब ‘पैरवी’ का जमाना गया
जब भी बिहार बोर्ड मैट्रिक इंटर की परीक्षा में किसी कमजोर छात्र के मार्क्स आपसे अधिक आ जाती है तो पहला शक यही पैदा होता है कि जरूर उसके माता-पिता या किसी फैमिली मेंबर ने पैरवी करवाई होगी। लेकिन यह सच नहीं है पुराने समय में कॉपियां हाथ से जांची जाती थीं जिसकी वजह से नंबर जोड़ने में गलतियां हो जाती थीं। लेकिन अब बिहार बोर्ड ‘कंप्यूटराइज्ड मार्क्स एंट्री‘ सिस्टम से कॉपीया चेक करता है। परीक्षार्थी की कॉपी जैसे ही चेक होती है, परीक्षक उसे तुरंत कंप्यूटर पर फीड कर देता है। इसका मतलब यह है कि अब नंबरों के हेरफेर की कोई गुंजाइश ही नहीं हैं।
Bihar Board Copy Checking Process
बिहार बोर्ड (BSEB) जैसे ही मैट्रिक इंटर का परिणाम जारी करता है तो कुछ छात्र टॉपर की चर्चा करते हैं वही, जिनके मार्क्स अच्छे होते हैं वह खुश होते हैं और जिनके मार्क्स कम होते हैं वह थोड़ी उदास हो जाते हैं लेकिन वही बहुत से छात्रों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर BSEB मैट्रिक-इंटर की कॉपियां कैसे जांची जाती हैं? और इसका एक बड़ा कारण है उनसे कमजोर छात्रों के अधिक मार्क्स आना। क्योंकि छात्रों को बिहार बोर्ड का सीक्रेट स्टेप-मार्किंग के बारे में पता नहीं है।
बिहार बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा में उपस्थित छात्रों के कॉपियों के साथ क्या होता है? एक परीक्षक (Examiner) आपकी कॉपी में क्या ढूंढता है ये आप कभी सोच भी नहीं सकते हैं।
स्टेप-मार्किंग का जादू: क्यों आधा जवाब लिखना भी जरूरी है?
देखिए बिहार बोर्ड मैट्रिक इंटर की परीक्षा में कमजोर बच्चे क्वेश्चन का उत्तर देते समय एक गलती करते हैं वह बिना सोचे समझे प्रश्नों के उत्तर जितना आता है उतना देते हैं। कम पढ़ा अभ्यर्थी सीधा मुद्दे पर बात करता है और और वह दूसरे के कुछ महत्वपूर्ण बातों को याद रखता है जैसे कि एक भी क्वेश्चन नहीं छोड़ना है। जितना आए प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देना है। बस यही गलती उनके लिए सही साबित हो जाती है जब बोर्ड अपना सीक्रेट तरीका स्टेप-मार्किंग’ (Step-Marking) अपनाते हैं। दरअसल बिहार बोर्ड के द्वारा परीक्षक को सख्त निर्देश होता है कि वे ‘स्टेप-मार्किंग’ (Step-Marking) का पालन करें।
बिहार बोर्ड का सीक्रेट तरीका ‘स्टेप-मार्किंग’ (Step-Marking) कैसे काम करता है?
- गणित (Maths): कई बार आप गणित के प्रश्न के उत्तर देते समय फॉर्मूला तो सही लिखते है लेकिन कैलकुलेशन में गलती कर देते हैं, सही उत्तर न होने के बाद भी आपको 5 में से 2 या 3 नंबर जरूर मिल जाते हैं।
- विज्ञान और सामाजिक विज्ञान: अगर आपको जीव विज्ञान सामाजिक विज्ञान प्रश्न का उत्तर याद नहीं है यदि आपने उस प्रश्न के उत्तर को समझने के लिए एक छोटा सा डायग्राम (चित्र) बना दिया है, तो परीक्षक काफी खुश होते हैं और आपको कुछ ना कुछ अंक मिलने के चांस बढ़ जाते हैं।
यही कारण है कि जो छात्र कुछ भी लिखकर आते हैं, उनके पास होने की संभावना उन छात्रों से ज्यादा होती है जो सवाल खाली छोड़ देते हैं।
3. ‘ग्रेस मार्क्स’ का अनकहा सच
अगर आपने किसी छात्र के मार्कशीट चेक किए होंगे तो आपने देखा होगा कि छात्र के सभी विषयों को मिलने पर जो मार्क्स आ रहा है वह फाइनल मार्क्स से कम है। अगर आप ठीक से गौर करेंगे तो आपको पता चलेगा कि छात्र को एक सब्जेक्ट में “ग्रेस मार्क्स” देकर पास किया गया है। हालांकि बिहार बोर्ड इस नीति के बारे में कभी खुलकर विज्ञापन नहीं देता है। यही कारण है कि आपको लगता है कि वह छात्र जो आपसे पढ़ने में कमजोर है वह फेल हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं होता है एक वजह ग्रेस मार्क्स भी है। Bihar Board Copy Checking Process के दौरान यह खास ध्यान रखते है कि किसी भी छात्र का साल बर्बाद न हो। हालांकि, यह केवल तभी होता है जब आपने बाकी विषयों में अच्छा प्रदर्शन किया हो।
4. टॉपर्स की कॉपियां दोबारा क्यों जांची जाती हैं?
आपके मन में यह सवाल है जरूर आता होगा कि इतने लाखों कॉपियों के बीच टॉपर को कैसे चुना जाता है। इसका सीधा जवाब है कि लाखों अभ्यार्थियों की कॉपी चेक करने के दौरान जब किसी छात्र का मार्क्स 90% से ज्यादा होता है तो उसकी कॉपियों को अलग कर लिया जाता है। अब इसमें सबसे अधिक अंक लाने वाले छात्रों की कॉपी निकल जाती है। जिस छात्र को सबसे अधिक अंक प्राप्त होता है उसकी कॉपियों को एक बार नहीं बल्कि तीन बार जांची जाती है।
- पहली बार सामान्य परीक्षक जांचता है।
- दूसरी बार हेड-एग्जामिनर उसे देखता है।
- तीसरी बार, रिजल्ट घोषित होने से पहले, बोर्ड उन कॉपियों को पटना मंगाकर विशेषज्ञों से दोबारा चेक करवाता है।
- इसके अलावा छात्र को बुलाकर बोर्ड की परीक्षा में पूछे गए सवालों को दोहराया जाता है और सामान्य राग एग्जाम टेस्ट लिया जाता है। अगर आप इस परीक्षा को पास कर जाते हैं तो इसका मतलब है कि आपकी मेहनत में कोई कमी नहीं थी।
5. लिखावट (Handwriting) का मनोविज्ञान
यह बात लगभग छात्रों के मुंह से सुनने को मिलता है कि अच्छे लिखावट वाले छात्रों को अच्छा अंक मिलता है भले ही वह प्रश्नों के उत्तर सही से न दिए हो। हालांकि बोर्ड इस चीज से मुकरता है कि लिखावट खराब होने पर वह नंबर नहीं कटता है। लेकिन एक परीक्षक को दिन में 50-60 कॉपियां चेक करनी होती हैं। जिस छात्र की कॉपी साफ-सुथरी होती है, जिसमें ‘काट-कूट’ कम होती है, उसे परीक्षक अनजाने में ही 1-2 नंबर ज्यादा दे देता है। इसे ‘हेलो इफेक्ट’ (Halo Effect) कहते हैं। अगर आप भी उस परीक्षक की जगह पर होते तो यही करते। क्योंकि अच्छी प्रेजेंटेशन सभी को पसंद आता है।
6. अच्छे मार्क्स लाने के लिए क्या करें
मैं अपने अनुभव से या बता रहा हूं कि अच्छे मार्क्स लाने के लिए सिर्फ क्वेश्चन के उत्तर देना ही नहीं है बल्कि कुछ बातों का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है। परीक्षा हॉल में आंसर शीट मिलने पर क्वेश्चन पेपर में मौजूद चौथाई को इग्नोर कर सबसे पहले आप उस शीट को मोड़कर चार भाग में बाट ले, अब एक भाग को छोड़कर तीन भाग में दिखाई देने योग्य अक्षरों में साफ सुथरा अक्षरों के बीच समान दूरी बनाए रखते हुए प्रश्नों के उत्तर दें। अगर एक दो शब्द गलत हो जाता है तो सिर्फ एक बार कलम से कट करें उसे काट-कुट कर गंदा ना करें इससे साफ-सुथरा पेपर देखने में खराब लगता है।
कोशिश करें की सभी प्रश्नों के उत्तर जरूर दें। उत्तर देते समय पैराग्राफ का ध्यान रखें। इसके साथ ही महत्वपूर्ण बिंदु को नंबर देकर शामिल करें। अगर जरूरी हो तो चित्र बनाकर समझा सकते हैं। हालांकि Bihar Board Copy Checking Process पहले से काफी अच्छी हो गई हो इसलिए आपको जीरो मार्क्स के बजे एक-दो अंक तो मिल ही जाएंगे।
निष्कर्ष: आपके लिए सलाह
मेरा आपसे बस यही कहना है कि परीक्षा के परिणाम जारी होने से पहले तनाव होना स्वाभाविक है। लेकिन यहां भी याद रखना जरूरी है कि पहले की तुलना में अब बिहार बोर्ड छात्र-छात्राओं के सही भविष्य के बारे में सोचते हैं। अगर आपने कॉपी में सवालों के आस-पास भी कुछ लिखा है, तो आपके सफल होने की संभावना है। परिणाम चाहे जैसा भी आएं बिल्कुल भी घबराना या हताश नहीं होना है। क्योंकि आज का परिणाम आपका भविष्य निश्चित नहीं करता है आपको आगे मेहनत करने के बारे में सोचना चाहिए।
अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो इसे दूसरों के साथ शेयर करें और ऐसे ही हमने How is the Online Exam Conducted? के बारे में विस्तार से बताया है आप इसे पढ़ सकते हैं। बिहार बोर्ड BSEB के आधिकारिक वेबसाइट पर जाने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
